ParamhansShrirambabajee: ईश्वर सिर्फ मनुष्य जैसा नहीं होता, विविध जीवों, निर्जीवों में भी है, इस दिशा से ही विधाता से संवाद संभव

Article_Series_6

परमहंस श्रीराम बाबाजी हनुमानजी श्रृंखलाः आलेख-6 बरुण सखाजी श्रीवास्तव सोहम की स्थिति में सामान्य देह में साक्षात ब्रह्म विराजता है। यह हमारे सारे ग्रंथ कहते हैं। आध्यात्मिक जितने भी शोध हुए हैं वे सब बताते हैं अहम ब्रह्मास्मि एक स्थिति…

ParamhansShrirambabajee: परमतत्व का बिंब तभी प्रकट होता है जब निर्मल सत्संगति हो रही हो, प्रयोग के अभीष्ट से नहीं

Article-5

परमहंस श्रीराम बाबाजी हनुमानजी श्रृंखलाः आलेख-5 बरुण सखाजी श्रीवास्तव जब मन, वचन, कर्म से मनुष्य एक हो जाता है, तब उसमें ईश्वरीय बिंब प्रकट हो जाता है। परमहंस श्रीराम बाबाजी हनुमानजी एक पल के करोड़वें हिस्से में भी किसी दुविधा…

ParamhansShrirambabajee: परमतत्व की साधना में आग्रह की मिलावट नहीं होना चाहिए, तभी ईश्वर प्रकट होगा

Article Series 4

परमहंस श्रीराम बाबाजी हनुमानजी श्रृंखलाः आलेख-4 बरुण सखाजी श्रीवास्तव साधना औरउपासना दिखाई भी देती हैं और नहीं भी दिखाई देती। हमने इतिहास में अनेक महापुरुषों के के आंतरिक संकल्पों के बारे में पढ़ा है। इसका अर्थ है ऐसे संकल्प जो…

ParamhansShrirambabajee: दुविधाओं से मुक्ति, निरंतर हरि सुमिरन ही वास्तविक ईश्वरीय योग जो अंश को परमहंस तक ले जाता है

Article Series 3

परमहंस श्रीराम बाबाजी हनुमानजी श्रृंखलाः आलेख-3 बरुण सखाजी श्रीवास्तव परमहंस गुरुवर हनुमानजी अक्सर गाया करते थे, जो यही भांत बने संजोगा। अपने आंतरिक कीर्तन के साथ ही वे कई बार खंजरी लेकर बाह्य कीर्तन में भी जुट जाते थे। ईश्वरीय…