Paramhans_Shrirambabajee: चैतन्य ही ईश्वर है, यह सिर्फ वाक्य-विन्यास नहीं भीतर का अहसास है

बरुण सखाजी श्रीवास्तव रुद्रावतार हनुमानजी यानि परमतत्व राम के महाभक्त, अनंत शक्तिमान, शून्य अभिमान, राम किंकर, रामाज्ञयी, राममय, अनंत आकाश, अप्रमाणेय, विराट, सर्वतत्व, चिरअवतारी। जिन चित्रों में हनुमानजी को हम चित्र स्वरूप देखते हैं, जिन कथाओं में उनके स्वरूप को…






