परमहंस श्रीराम बाबाजी के सेवकों के संस्कार, गर्मियों में मूक प्राणियों को जलपान का प्रबंध जंगल जाकर करते हैं
अनिल रघुवंशी और उनके साथियों की सेवा।
अनिल रघुवंशी और उनके साथियों की सेवा।

परमभक्त श्री कुलदीप सिंह भाटी, सीगांव, जिला सीहोर, MP सत्यलोक यात्रा ऊँ श्री अमरा गुरु विजयते राम ऊँ श्री गुरुचरण कमलेभ्यो नमः ऊँ श्री गणेशाम्बिकायै नमः हरि ऊँ गुरूजी संत मिलन को चालिये, तज मान मोह अभिमान। ज्यों ज्यों पग…

परमहंस श्रीराम बाबाजी की अनंत कृपा से यज्ञ कार्यक्रम इस तरह से रहेगा।

बरुण सखाजी श्रीवास्तव अद्वैतः आध्यात्मिक क्रम में अद्वैत की व्याख्या जितनी आसान है उतनी ही कठिन है इसकी अभिव्यक्ति और सबसे ज्यादा कठिन है इसकी अनुपालना। अद्वैत कहने में दूसरा कोई नहीं। सर्वोच्च और एकम ईश्वर। एकम ईश्वर तो इतने…

बरुण सखाजी परहित बस जिनके मन माहीं, जिनको जग दुर्लभ कछु नाहीं। जिनके हृदय में परहित की भावना है उनके लिए संसार में कोई भी चीज पाना दुर्लभ नहीं है। इसके गूढ़ार्थ को समझना कठिन नहीं है। बहुत ही सरलता…

घड़ी-घड़ी सब घड़ी देखतेघड़ी न जाने कोयउस घड़ी को देखिएकौन घड़ी क्या होयooo==oooरे मन तू सत्संग करसीख भजन की रीतबैर, प्रीत, निंदा में हीगई आयु सब बीतooo===oooभजन करो भगवान काबिलंब जिन कोयन जाने इस देह काकौन घड़ी क्या होयooo===ooo

बरुण सखाजी श्रीवास्तव अध्यात्म या दर्शन का भाव जैसे-जैसे गहरा होता जाता है वैसे-वैसे हमारी अभिव्यक्ति बढ़ती जाती है। यही काम आयु के साथ भी होता है। हम जितने बूढ़े, बड़े होते जाते हैं उतने ही अनुभव बयान करने लगते…

सुवचनसत्य बोलो, पूरा तौलो,फिर मन चाहे जहां डोलो,बाहर की बंद करो,भीतर की खोलो-परमहंस श्रीराम बाबाजी

बरुण सखाजी श्रीवास्तव अध्यात्म या दर्शन का भाव जैसे-जैसे गहरा होता जाता है वैसे-वैसे हमारी अभिव्यक्ति बढ़ती जाती है। यही काम आयु के साथ भी होता है। हम जितने बूढ़े, बड़े होते जाते हैं उतने ही अनुभव बयान करने लगते…

बरुण सखाजी श्रीवास्तव अगर हम समझते हैं मनुष्य ही संसार को परिपूर्णता से समझता है शेष दूसरे प्राणी नहीं तो हम गलत भी हो सकते हैं। ईश्वर ने एक चीटीं को भी उतनी ही शिद्दत से बनाया है जितना कि…