सुवचन- मकर संक्रांति (14 जनवरी-2026)

सुवचनसत्य बोलो, पूरा तौलो,फिर मन चाहे जहां डोलो,बाहर की बंद करो,भीतर की खोलो-परमहंस श्रीराम बाबाजी

सुवचनसत्य बोलो, पूरा तौलो,फिर मन चाहे जहां डोलो,बाहर की बंद करो,भीतर की खोलो-परमहंस श्रीराम बाबाजी

बरुण सखाजी श्रीवास्तव अध्यात्म या दर्शन का भाव जैसे-जैसे गहरा होता जाता है वैसे-वैसे हमारी अभिव्यक्ति बढ़ती जाती है। यही काम आयु के साथ भी होता है। हम जितने बूढ़े, बड़े होते जाते हैं उतने ही अनुभव बयान करने लगते…

बरुण सखाजी श्रीवास्तव अगर हम समझते हैं मनुष्य ही संसार को परिपूर्णता से समझता है शेष दूसरे प्राणी नहीं तो हम गलत भी हो सकते हैं। ईश्वर ने एक चीटीं को भी उतनी ही शिद्दत से बनाया है जितना कि…

बरुण सखाजी श्रीवास्तव भारतीय व्यवस्था की रीढ़ है सनातन व्यवस्था। सनातन व्यवस्था की रीढ़ है जाति व्यवस्था। सनातन को सर्वोपरि बनाए रखने में इस व्यवस्था ने अहम रोल अदा किया है। कालांतर में जातिय भेद और उपेक्षा ने हिंदुत्व को…

बरुण सखाजी श्रीवास्तव नगर और गांव भारत की प्रमुख दो बसाहटें हैं। भारत का समाज इन दो बसाहटों से गुथा हुआ है। कहा जाए तो ये दो सिर्फ बसाहटें नहीं हैं बल्कि सभ्यताएं हैं। एक दौर में दोनों सभ्यताओं में…

बरुण सखाजी श्रीवास्तव, 9009986179 अक्सर हम प्रेम और मोह को एक ही मान लेते हैं। इस भ्रम से हम मोह की भौतिक रिश्तों और प्रेम को अभौतिक रिश्तों के रूप में मानकर व्याख्याएं करते रहते हैं। परमहंस श्रीराम बाबाजी प्रेम…

बरुण सखाजी श्रीवास्तव (पंचमंत्रों में विनम्रता या कृतज्ञता, संतोष, क्षमा, प्रेम और निर्भेद हो जाने के लिए 21-21 दिनों की श्रेणीबद्ध यात्रा का क्रम शामिल है। 105 दिनों की इस यात्रा में अपनी हर मानसिक गतिविधि को लिखें ताकि अंहकार…

बरुण सखाजी श्रीवास्तव परमहंस श्रीराम बाबाजी की बातों में सीधा, सपाट होता था, लेकिन विस्तार नहीं। विस्तार और व्याख्या वे भक्तों की मानसिक उर्बरा पर छोड़ते थे। लोगों की ग्राह्य क्षमता पर छोड़ते थे। कोई उनके कहे का अर्थ कितना निकालता…

बरुण सखाजी श्रीवास्तव थोड़े में बहुत कुछ देखना या बहुत कुछ में थोड़ा। यह हमारे ऊपर निर्भर करता। हम क्या देखते हैं। हम संसारी जरूरत की आड़ में बहुत कुछ में भी थोड़ा देखते हैं। प्राप्त हुए में भी अप्राप्त…

बरुण सखाजी श्रीवास्तव बीज पत्थर पर पड़ा रहे तो उसे कितना ही खाद-पानी मिले, वह बिना मिट्टी के विकसित नहीं होगा। फूल सकता है, फूलकर फट सकता है। उसमें संसारी भ्रम के लिए अंकुरण हो सकता है, संपूर्ण यात्रा के…