परमहंस श्रीराम बाबाजी के विविध स्वरूप





राम नाम की अनुभूति है, दिव्य जहां हनुमान।ऐसे निज धाम में, बैठे हैं गुरु भगवान।। == परमहंस हनुमानजी, देख रहे सब मौन। छन्ना-छन्ना पारकर, आए कितने कौन।। == परमहंस श्रीराम बाबाजी, कृपा आपकी होए। सबके मन मुस्कान है, खोज सके…



बरुण सखाजी श्रीवास्तव इंसानी दिमाग एक मिनट में हजार से अधिक विचार प्रकट करता है। सनातन विज्ञान के अनुसार चौरासी लाख योनियों में किसी दूसरे शरीरधारी अथवा अशरीरी की इतनी क्षमता नहीं है। लेकिन दिमाग की क्षमता एक बात है…

बरुण सखाजी श्रीवास्तव अध्यात्म बारीक विषय है। इतना सूक्ष्म कि सूक्ष्म में गोता लगाने वाले भी न खोज पाएं। ज्यों नाम की लालसा। हम कुछ करें या न करें, पर नाम हो। कुछ करें तो नाम न हो ऐसा तो…

बरुण सखाजी श्रीवास्तव फिल्म हनुमान अंश में नीब करोरी बाबाजी अपनी सेवा के लिए एक बहेलिया का चुनाव करते हैं। बहेलिया मतलब चिड़ियों को पकड़कर मारने वाला। इन्हें बेचकर अपना जीवन चलाने वाला। कितनी अजीब बात है। एक तरफ हनुमान…

बरुण सखाजी श्रीवास्तव चमत्कार हमारे मन का सबसे मजबूत और बड़ा आग्रह है। चमत्कार के बिना न आस्था जागती है न विश्वास स्थापित होता है। चमत्कारों में जीने वाले असल में नास्तिकता से भरे होते हैं। जैसे अक्सर नॉनबिलीवर्स यानि…