Paramhans_Shrirambabajee: प्रवचन नहीं वचन दो, जो कहो वो करो और जो करो वो ही हो

बरुण सखाजी श्रीवास्तव परमहंस श्रीराम बाबाजी की बातों में सीधा, सपाट होता था, लेकिन विस्तार नहीं। विस्तार और व्याख्या वे भक्तों की मानसिक उर्बरा पर छोड़ते थे। लोगों की ग्राह्य क्षमता पर छोड़ते थे। कोई उनके कहे का अर्थ कितना निकालता…








