Paramhans Shriram babajee: जो हो हमारे हिसाब से हो, अगर न हो तो भारी कष्ट है

बरुण सखाजी श्रीवास्तव हमें जो मिला वह हमारा अधिकार नहीं था, लेकिन हमार भीतरी अहंकार इसे अपना हक मानता है। कष्ट की उत्पत्ति इसी रास्ते से होती है। जो हो रहा है वह होता ही है, किंतु हमे लगता है…






