यात्रा वृतांत जब परमहंस श्रीराम बाबाजी न कहा जो जैसे मानेगा, वैसे जानेगा, भक्ति की शक्ति से रेवा को बुलाया

परमभक्त श्री कुलदीप सिंह भाटी, सीगांव, जिला सीहोर, MP सत्यलोक यात्रा ऊँ श्री अमरा गुरु विजयते राम ऊँ श्री गुरुचरण कमलेभ्यो नमः ऊँ श्री गणेशाम्बिकायै नमः हरि ऊँ गुरूजी संत मिलन को चालिये, तज मान मोह अभिमान। ज्यों ज्यों पग…

परमहंस श्रीराम बाबाजी अमरवाणी

बरुण सखाजी श्रीवास्तव अद्वैतः आध्यात्मिक क्रम में अद्वैत की व्याख्या जितनी आसान है उतनी ही कठिन है इसकी अभिव्यक्ति और सबसे ज्यादा कठिन है इसकी अनुपालना। अद्वैत कहने में दूसरा कोई नहीं। सर्वोच्च और एकम ईश्वर। एकम ईश्वर तो इतने…

श्रीराम बाबाजी सुवचनमः जरूरत को जरूरी क्यों मानते हो

Shriram babajee Amarvani

बरुण सखाजी परहित बस जिनके मन माहीं, जिनको जग दुर्लभ कछु नाहीं। जिनके हृदय में परहित की भावना है उनके लिए संसार में कोई भी चीज पाना दुर्लभ नहीं है। इसके गूढ़ार्थ को समझना कठिन नहीं है। बहुत ही सरलता…

परमहंस श्रीराम बाबाजीः अमरवाणी

Shriram babajee Amarvani

घड़ी-घड़ी सब घड़ी देखतेघड़ी न जाने कोयउस घड़ी को देखिएकौन घड़ी क्या होयooo==oooरे मन तू सत्संग करसीख भजन की रीतबैर, प्रीत, निंदा में हीगई आयु सब बीतooo===oooभजन करो भगवान काबिलंब जिन कोयन जाने इस देह काकौन घड़ी क्या होयooo===ooo

Paramhans_Shrirambabajee: भक्ति का रस जो चखे वह भीतर ही स्वाद रखे

Shriram babajee bhakti

बरुण सखाजी श्रीवास्तव अध्यात्म या दर्शन का भाव जैसे-जैसे गहरा होता जाता है वैसे-वैसे हमारी अभिव्यक्ति बढ़ती जाती है। यही काम आयु के साथ भी होता है। हम जितने बूढ़े, बड़े होते जाते हैं उतने ही अनुभव बयान करने लगते…