shrirambabajee@gmail.com

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अनुकूलता-प्रतिकूलता ही सारे सुख-दुख की जड़ है, इससे निपटना ही परमहंसत्व है

बरुण सखाजी श्रीवास्तव अनुकूलता ही सुख है और प्रतिकूलता दुख। दुख और सुख अगर दुनिया में होते तो वे सबके लिए एक समान होते। जब एक दुखी होता तो सभी दुखी होते और एक सुखी होता तो सभी सुखी होते।…

परमहंस श्रीराम बाबाजी, जिनका न कोई अतिप्रिय न कोई उनसे दूर

बरुण सखाजी श्रीवास्तव अहंकार की एक ही पहचान है। जब आपको लगे कि आपका अहंकार कम है। आपको लगे, ज्यादा हो रहा है। कभी आपको ऐसा लगे कि है ही नहीं तब समझिए आप अहंकार से भरे पड़े हैं। जब…

श्रीराम बाबाजी को श्रद्धांजलि

परमहंस श्रीराम बाबाजी की चिर-स्मृतिश्रीगुरु स्मृति- परमहंस श्रीराम बाबाजी विशाल जैसे हो तरुवर। परम पूज्य श्री श्री गुरुवर।। सब कष्टों के समाधान।साक्षात श्री गुरु भगवान।। परमहंस की प्रभुताई।हम सब पर कृपा छाई।। श्रीचरणों में उनका वंदन।जो स्वयं चेतन के चंदन।।समय…

परमहंस श्रीराम बाबाजी पर दोहे

राम नाम की अनुभूति है, दिव्य जहां हनुमान।ऐसे निज धाम में, बैठे हैं गुरु भगवान।। == परमहंस हनुमानजी, देख रहे सब मौन। छन्ना-छन्ना पारकर, आए कितने कौन।। == परमहंस श्रीराम बाबाजी, कृपा आपकी होए। सबके मन मुस्कान है, खोज सके…

दिमाग में उमड़ते विचारों पर काबू पाने का महाराजजी का सरल तरीका निःशंक हो जाना

बरुण सखाजी श्रीवास्तव इंसानी दिमाग एक मिनट में हजार से अधिक विचार प्रकट करता है। सनातन विज्ञान के अनुसार चौरासी लाख योनियों में किसी दूसरे शरीरधारी अथवा अशरीरी की इतनी क्षमता नहीं है। लेकिन दिमाग की क्षमता एक बात है…