अनुकूलता-प्रतिकूलता ही सारे सुख-दुख की जड़ है, इससे निपटना ही परमहंसत्व है

बरुण सखाजी श्रीवास्तव अनुकूलता ही सुख है और प्रतिकूलता दुख। दुख और सुख अगर दुनिया में होते तो वे सबके लिए एक समान होते। जब एक दुखी होता तो सभी दुखी होते और एक सुखी होता तो सभी सुखी होते।…







