Paramhans Shriram Babajee Spiritual Talk: हानि, लाभ, जीवन, मरण, जस, अपजस विधि हाथ को आत्मसात करना ही कर्मशुद्धि है…

हमने सोच लिया जो होगा वही होगा, यह लाभ भी है और हानि भी, यह जीवन भी है मरण भी, यह जयकार भी है और अपकार भी। दोनो ही ईश्वरीय वरदान हैं। -परमहंस श्रीराम बाबाजी व्याख्याकार- बरुण सखाजी श्रीवास्तव परमहंस…


