shrirambabajee@gmail.com

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Paramhans_Shrirambabajee: शरणागति वही है जो लगे कि अभी नहीं है, जो लगे कि है वह तो निरा पाखंड है…

बरुण सखाजी श्रीवास्तव शरणागति का जब आभास होने लग जाए तो समझना चाहिए शरणागति नहीं है और जब लगे कि शरणगति है तभी सबसे ज्यादा सावधानी की जरूरत होती है। एक शरणागत स्यवं को कभी शरणागत नहीं समझता। जो समझता…

Paramhans_Shrirambabajee: कुछ से बहुत कुछ तो बन सकता है, लेकिन बनाने वाला गुरु हो तभी संभव है

बरुण सखाजी श्रीवास्तव सत्य तत्व से ही दुनिया चल रही है। यह हमे प्रकृति भी सिखाती है। परमहंस श्रीराम बाबाजी हनुमाजी इस बात को कहते थे, कछु तो हुए। इसका अर्थ बुंदेली में कुछ तो होगा, होता है। वे व्यक्ति…

भजन साधन

ईश्वर तक पहुंचने का भजन इकलौता ऐसा रास्ता है जिसके लिए आपको किसी विधान, संविधान की जरूरत नहीं। एकनिष्ठ होकर भजन सर्वदोष नाशक महामंत्र है। -परमहंस श्रीराम बाबाजी

Paramhans_Shrirambabajee: चार करो विचार, संवाद ही संदेह से मुक्ति का सर्वोत्तम मार्ग है

बरुण सखाजी श्रीवास्तव सनातन संस्कृति में विचार का बड़ा महत्व है। किसी कार्य से पहले अच्छी तरह से सोचना, विचारना, समझना, तौलना फिर करना, एक प्रक्रिया माना गया है। परमहंस श्रीराम बाबाजी इस बात को कहा करते थे। बिना बिचारे…

Paramhans_Shrirambabajee: चैतन्य ही ईश्वर है, यह सिर्फ वाक्य-विन्यास नहीं भीतर का अहसास है

बरुण सखाजी श्रीवास्तव रुद्रावतार हनुमानजी यानि परमतत्व राम के महाभक्त, अनंत शक्तिमान, शून्य अभिमान, राम किंकर, रामाज्ञयी, राममय, अनंत आकाश, अप्रमाणेय, विराट, सर्वतत्व, चिरअवतारी। जिन चित्रों में हनुमानजी को हम चित्र स्वरूप देखते हैं, जिन कथाओं में उनके स्वरूप को…

Paramhans_Shrirambabajee: साधक, सिद्ध, सुजान, कौन सबसे निचला पायदान

Shriram babajee

बरुण सखाजी श्रीवास्तव, 9009986179 परमहंस श्रीराम बाबाजी मौन बैेठे थे। उसी बीच मेरे वरिष्ठ मित्र दर्शन के लिए आए। महाराज जी ने आंखें खोलकर बोला तीन बैठे हैं, साधक, सिद्ध, सुजान। शक्कर, नमक, चाउंर। बुद्धि में ही विचरण करने वाला…

Paramhans_Shrirambabajee Talks: प्रसिद्धि परिणाम नहीं योग है, प्राप्ति-अप्राप्त से परे रहिए, न स्वागत कीजिए न विलाप

परमहंस गुरुवर श्रीराम बाबाजी प्रसिद्धि की अंहकार का प्रवेश द्वार मानते हैं। वे स्वयं मृणमयी बने रहकर ही अनंतकाल तक चिर-अंतर में विराजमान हैं।