परमहंस श्रीराम बाबाजी दिव्य दर्शन



बरुण सखाजी श्रीवास्तव हमें जो मिला वह हमारा अधिकार नहीं था, लेकिन हमार भीतरी अहंकार इसे अपना हक मानता है। कष्ट की उत्पत्ति इसी रास्ते से होती है। जो हो रहा है वह होता ही है, किंतु हमे लगता है…

बरुण सखाजी श्रीवास्तव घृणा का जन्म अहंकार से होता है और अहंकार का जन्म अपने कर्ताभाव से होता हैl परमहंस श्रीराम बाबाजी हनुमानजी अपनी हर क्रिया में यह बताने का प्रयास किया करते थे कि कर्ताभाव त्याग दोl इसका त्याग…

बरुण सखाजी श्रीवास्तव, 9009986179 मूर्ति, जप, ध्यान और सोहम तक की यात्रा जटिल, भटकाऊ, भड़काऊ, बाधाओं से भरी और कई सारे जंक्शंस से होकर गुजरती है। एक प्रतिमा में ईश्वर की खोज फिर उस प्रतिमा के प्रति अपने आग्रहों का…




