ParamhansShrirambabajee: ईश्वर सिर्फ मनुष्य जैसा नहीं होता, विविध जीवों, निर्जीवों में भी है, इस दिशा से ही विधाता से संवाद संभव
ParamhansShrirambabajee: परमतत्व का बिंब तभी प्रकट होता है जब निर्मल सत्संगति हो रही हो, प्रयोग के अभीष्ट से नहीं