Paramhans_Shrirambabajee: प्रेम और मोह आपस में गुथे दो ऐसे छोर हैं जो ठीक विपरीत दिशाओं में जाकर खुलते हैं

बरुण सखाजी श्रीवास्तव, 9009986179 अक्सर हम प्रेम और मोह को एक ही मान लेते हैं। इस भ्रम से हम मोह की भौतिक रिश्तों और प्रेम को अभौतिक रिश्तों के रूप में मानकर व्याख्याएं करते रहते हैं। परमहंस श्रीराम बाबाजी प्रेम…








