Paramhans_Shrirambabajee: चार करो विचार, संवाद ही संदेह से मुक्ति का सर्वोत्तम मार्ग है

बरुण सखाजी श्रीवास्तव सनातन संस्कृति में विचार का बड़ा महत्व है। किसी कार्य से पहले अच्छी तरह से सोचना, विचारना, समझना, तौलना फिर करना, एक प्रक्रिया माना गया है। परमहंस श्रीराम बाबाजी इस बात को कहा करते थे। बिना बिचारे…

Paramhans_Shrirambabajee: चैतन्य ही ईश्वर है, यह सिर्फ वाक्य-विन्यास नहीं भीतर का अहसास है

बरुण सखाजी श्रीवास्तव रुद्रावतार हनुमानजी यानि परमतत्व राम के महाभक्त, अनंत शक्तिमान, शून्य अभिमान, राम किंकर, रामाज्ञयी, राममय, अनंत आकाश, अप्रमाणेय, विराट, सर्वतत्व, चिरअवतारी। जिन चित्रों में हनुमानजी को हम चित्र स्वरूप देखते हैं, जिन कथाओं में उनके स्वरूप को…

Paramhans_Shrirambabajee: साधक, सिद्ध, सुजान, कौन सबसे निचला पायदान

Shriram babajee

बरुण सखाजी श्रीवास्तव, 9009986179 परमहंस श्रीराम बाबाजी मौन बैेठे थे। उसी बीच मेरे वरिष्ठ मित्र दर्शन के लिए आए। महाराज जी ने आंखें खोलकर बोला तीन बैठे हैं, साधक, सिद्ध, सुजान। शक्कर, नमक, चाउंर। बुद्धि में ही विचरण करने वाला…

Paramhans_Shrirambabajee Talks: प्रसिद्धि परिणाम नहीं योग है, प्राप्ति-अप्राप्त से परे रहिए, न स्वागत कीजिए न विलाप

परमहंस गुरुवर श्रीराम बाबाजी प्रसिद्धि की अंहकार का प्रवेश द्वार मानते हैं। वे स्वयं मृणमयी बने रहकर ही अनंतकाल तक चिर-अंतर में विराजमान हैं।

जब परमहंस श्रीराम बाबाजी ने दिए जलाए तो मनी दिवाली

Shrirram babajee

बरुण सखाजी यह बात संभवतः सुप्रीम कोर्ट के रामलल्ला मंदिर पर आए वरडिक्ट से पहले की है। मैं दिवाली पर उदयपुरा में था। पंचमुखी पर महाराज जी परमहंस श्रीराम बाबाजी विराजमान थे। अपने गांव जाने से पूर्व मैं पंचमुखी पर…

Paramhans Shriram Babajee Spiritual Talk_ मैं, मेरा, मैं ही अहंकार है फिर यह भक्ति का हो या वस्तु का फर्क नहीं पड़ता

Baba Jagnnath

विवेचना- बरुण सखाजी श्रीवास्तव बहुत ध्यान से देखिए। यह तस्वीर सैकड़ों वर्ष पुरानी बाबा जगन्नाथ की है। मुद्रा, भाव, भंगिमा, तौर, तरीका जो कुछ भी इस तस्वीर में ध्यानपूर्वक समझा, देखा, जाना जा सकता है, वह सब परमहंस गुरुवर हनुमानजी…

Paramhans Shriram Babajee Spiritual Talk: हानि, लाभ, जीवन, मरण, जस, अपजस विधि हाथ को आत्मसात करना ही कर्मशुद्धि है…

Shrirram babajee

हमने सोच लिया जो होगा वही होगा, यह लाभ भी है और हानि भी, यह जीवन भी है मरण भी, यह जयकार भी है और अपकार भी। दोनो ही ईश्वरीय वरदान हैं। -परमहंस श्रीराम बाबाजी व्याख्याकार- बरुण सखाजी श्रीवास्तव परमहंस…