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Paramhans_Shrirambabajee: प्रेम और मोह आपस में गुथे दो ऐसे छोर हैं जो ठीक विपरीत दिशाओं में जाकर खुलते हैं

बरुण सखाजी श्रीवास्तव, 9009986179 अक्सर हम प्रेम और मोह को एक ही मान लेते हैं। इस भ्रम से हम मोह की भौतिक रिश्तों और प्रेम को अभौतिक रिश्तों के रूप में मानकर व्याख्याएं करते रहते हैं। परमहंस श्रीराम बाबाजी प्रेम…

Paramhans_Shrirambabajee: श्रीराम बाबाजी के पंचमंत्र, जीवन को करेंगे स्वतंत्र, 105 दिनों की यात्रा, भरपूर आनंद की मात्रा

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बरुण सखाजी श्रीवास्तव (पंचमंत्रों में विनम्रता या कृतज्ञता, संतोष, क्षमा, प्रेम और निर्भेद हो जाने के लिए 21-21 दिनों की श्रेणीबद्ध यात्रा का क्रम शामिल है। 105 दिनों की इस यात्रा में अपनी हर मानसिक गतिविधि को लिखें ताकि अंहकार…

Paramhans_Shrirambabajee: प्रवचन नहीं वचन दो, जो कहो वो करो और जो करो वो ही हो

बरुण सखाजी श्रीवास्तव परमहंस श्रीराम बाबाजी की बातों में सीधा, सपाट होता था, लेकिन विस्तार नहीं। विस्तार और व्याख्या वे भक्तों की मानसिक उर्बरा पर छोड़ते थे। लोगों की ग्राह्य क्षमता पर छोड़ते थे। कोई उनके कहे का अर्थ कितना निकालता…

Paramhans_Shrirambabajee: कम में ज्यादा देखने का भाव आनंद में रहने का महामंत्र है…

बरुण सखाजी श्रीवास्तव थोड़े में बहुत कुछ देखना या बहुत कुछ में थोड़ा। यह हमारे ऊपर निर्भर करता। हम क्या देखते हैं। हम संसारी जरूरत की आड़ में बहुत कुछ में भी थोड़ा देखते हैं। प्राप्त हुए में भी अप्राप्त…

Paramhans_Shrirambabajee: बीज की बीज फिर तक की यात्रा अहंकार के पत्थर पर नहीं मृदु मृदा में संभव है

बरुण सखाजी श्रीवास्तव बीज पत्थर पर पड़ा रहे तो उसे कितना ही खाद-पानी मिले, वह बिना मिट्टी के विकसित नहीं होगा। फूल सकता है, फूलकर फट सकता है। उसमें संसारी भ्रम के लिए अंकुरण हो सकता है, संपूर्ण यात्रा के…

Paramhans_Shrirambabajee: शरणागति वही है जो लगे कि अभी नहीं है, जो लगे कि है वह तो निरा पाखंड है…

बरुण सखाजी श्रीवास्तव शरणागति का जब आभास होने लग जाए तो समझना चाहिए शरणागति नहीं है और जब लगे कि शरणगति है तभी सबसे ज्यादा सावधानी की जरूरत होती है। एक शरणागत स्यवं को कभी शरणागत नहीं समझता। जो समझता…

Paramhans_Shrirambabajee: कुछ से बहुत कुछ तो बन सकता है, लेकिन बनाने वाला गुरु हो तभी संभव है

बरुण सखाजी श्रीवास्तव सत्य तत्व से ही दुनिया चल रही है। यह हमे प्रकृति भी सिखाती है। परमहंस श्रीराम बाबाजी हनुमाजी इस बात को कहते थे, कछु तो हुए। इसका अर्थ बुंदेली में कुछ तो होगा, होता है। वे व्यक्ति…

भजन साधन

ईश्वर तक पहुंचने का भजन इकलौता ऐसा रास्ता है जिसके लिए आपको किसी विधान, संविधान की जरूरत नहीं। एकनिष्ठ होकर भजन सर्वदोष नाशक महामंत्र है। -परमहंस श्रीराम बाबाजी