श्री दादाजी कहते थे….
रावण ने कैलाश पर्वत उठा लिया था
वह भी केवल शिव की भक्ति के कारण
बाकी अहंकार से तो वह
अंगद का पाँव भी नहीं उठवा पाया था
भावना में भाव नहीं तो भावना बेकार

और भावना में भाव है तो भव से बेड़ा पार
जा की रही भावना जैसी
प्रभु मूरत देखी तिन तैसी

पंडित राजकुमार पाराशर

shrirambabajee@gmail.com
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