परमहंस श्रीराम बाबाजी के कई स्थान, कोई उनका अधिकृत नहीं कोई अनाधिकृत नहीं

परमहंस श्रीराम बाबाजी ने अपने जीवन में अपना कोई भी अधिकृत स्थान नहीं बनाया। वे कई जगहों पर विराजमान रहे, किंतु कभी किसी स्थान को अपना स्थान नहीं कहा। मध्यप्रदेश के जिला रायसेन के पावन शहर उदयुपरा स्थिति पंचमुखी हनुमान मंदिर से उनका अपना भाव था, किंतु वहां कुछ असामाजिक तत्वों की सक्रियता के कारण वे उसे छोड़ते रहे हैं। यद्यपि वे इस स्थान को पंचमुखी हनुमान के विकराल स्वरूप का स्थान मानते हैं। अपनी जल समाधि से पूर्व भी वे वहां रुके थे, किंतु स्थान पर कुछ आसामाजिक तत्वों के कब्जे के कारण वे अपने शरीर को लेकर बौरास चले गए। बौरास में नर्मदा मैया में विलीन हो गए।

तलापुरा उदयपुरा स्थिति हनुमान मंदिर को परमहंस श्रीराम बाबाजी अपना थाना कहते थे। अपनी अटपट भाषा में वे पंचमुखी हनुमान मंदिर को अपनी चौकी बताते थे। इस नाते श्री रामेष्ठ हनुमान सेवा समिति, तलापुरा हनुमान मंदिर की ओर से इस मंदिर परिसर में भव्यतम समाधि का निर्माण प्रगति पर है। पूरी तरह से मार्बल से युक्त इस समाधि में भगवान श्रीराम बाबाजी की भव्य मूर्ति विराजित होगी। इसका निर्माण जयपुर में जारी है। इस दिव्य स्थान की वर्तमान तस्वीरें आपके साथ शेयर की जा रही हैं। आपको बता दें परमहंस हनुमानजी श्रीराम बाबाजी अपना कोई भी स्थान अधिकृत नहीं करके गए हैं। इसलिए हर स्थान उनका स्थान है। कोई तालाबंदी नहीं, कोई बागड़बंदी नहीं, किसी भक्त में कोई भेद नहीं, कोई मतभेद नहीं, अंत समय के वाक्य को हर भक्त धारण करके चलते हैं जुरे-मिले रहिए। मुक्त सदैव आनंद में रहने वाले महाराजजी निराग्रही रहे हैं। इसिलए उनके किसी विशेष, प्रमुख, प्रथम इत्यादि विश्लेषण लगे स्थान संबंधी सभी दावे उनके भाव के विपरीत हैं। अतः उदयुपरा तलापुरा में बनी समाधि भी प्रतीकात्मक स्वरूप है। हम भौतिक जीवियों के लिए संसार में कोई संपूर्ण स्थान चाहिए होता है, इसी ध्येय के साथ श्रीराम बाबाजी भक्त मंडल समिति और श्रीरामेष्ठ हनुमान सेवा समिति द्वारा इस समाधि का विचार साकार हो रहा है। यह भगवान परमहंस हनुमानजी श्रीराम बाबाजी की कृपा से ही संभव है।

परमहंस श्रीराम बाबाजी के सेवकों में शामिल अरविंद धाकड़ परिवार ने भी सिलवानी रोड, उदयुपरा जिला रायसेन मध्यप्रदेश में एक कुटिया बनाई है। इसका नाम सुमरिनी कुटिया है। इस स्थान पर भगवान गुरुवर श्रीराम बाबाजी की एक मूर्ति उनके दिव्य विग्रह के रूप में है। यह मूर्ति उनके ही स्वरूप में सतत यात्रा करती रहती है। यहां सेवक के रूप में परमहंस श्रीराम बाबाजी के परमदास सर्वोच्च सेवा प्राप्त गुड्डा बाबाजी रहते हैं।

इनके साथ ही कालापाठा जिला विदिशा मध्यप्रदेश में भी परमहंस श्रीराम बाबाजी का स्थान है। यहां पर भी भक्तगण सुबह शाम समस्त भावों के साथ पूजा, अर्चना करते हैं। यह स्थान भी परमहंस श्रीराम बाबाजी का अतिप्रिय स्थान था।

भक्त शिरोमणि महेंद्र शर्माजी ने भी गंजबासौदा जिला विदिशा स्थित अपने खेत में शिव मंदिर बनवाकर परमहंस श्रीराम बाबाजी की मूर्ति स्थापित की है। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि महेंद्र जी की लिखी आरती ही परमहंस हनुमानजी श्रीराम बाबाजी ने अपने जीवनकाल में ही अनुमोदित कर दी थी। सभी आश्रमों पर यही आरती चलती है। भगवान सबके भाव के साथ रहते थे, इसलिए वे सब जगह विराजमान हैं। महेंद्रजी परमहंस श्रीराम बाबाजी के सबसे निकटस्थ शिष्यों में शामिल हैं।

श्रीराम बाबाजी हनुमानजी की जल समाधि के बाद भक्त शिरोमणि मनमोहन सिंह ने जिला रायसेन, उदयपुरा के पास नर्मदा तट बौरास पर अपने फार्म हाउस को मंदिर की तरह आश्रममय बनाया है। यहां नित, संध्या, प्रातः आरती, कीर्तन, भंडारा चलता रहता है। इस स्थान पर ही परमहंस श्रीराम बाबाजी ने देह त्याग किया है। यहीं से उन्हें सदेह नर्मदा में विलीन किया गया था। इस नाते इस स्थान का अपना महत्व है।

shrirambabajee@gmail.com
shrirambabajee@gmail.com
Articles: 92