परमहंस श्रीराम बाबाजी की चिर-स्मृति
श्रीगुरु स्मृति- परमहंस श्रीराम बाबाजी
विशाल जैसे हो तरुवर।
परम पूज्य श्री श्री गुरुवर।।
सब कष्टों के समाधान।
साक्षात श्री गुरु भगवान।।
परमहंस की प्रभुताई।
हम सब पर कृपा छाई।।
श्रीचरणों में उनका वंदन।
जो स्वयं चेतन के चंदन।।
समय करे जिनका अभिनंदन।।।
असीम आकाश के अब रहवासी।
उनकी स्मृति हमारी काशी।।
माया के सब बंदीजन को।
मोह-मद में लिपटे तन को।।
निर्मलता की राह दे गए।
सारे कलुष साथ ले गए।।
आडंबर की मटकी फोड़ी।
अहंकार की बांह मरोड़ी।।
औघड़ काया, अलख निरंजन।
न ठौर कहीं, न कोई बंधन।।
काल के कपाल पर नित्य का नर्तन।
रूपातंर की बेला में पुकार रहा परिवर्तन।।
तैयार खड़ा है सत का रथ।
नेपथ्य से दिखा रहे गुरुदेव मुक्तिपथ।।
।।ऊं शांति, ऊं शांति..ऊं शांतिः।।
सतीश सिंह ठाकुर, रायपुर



