यात्रा वृतांत जब परमहंस श्रीराम बाबाजी न कहा जो जैसे मानेगा, वैसे जानेगा, भक्ति की शक्ति से रेवा को बुलाया

परमभक्त श्री कुलदीप सिंह भाटी, सीगांव, जिला सीहोर, MP

सत्यलोक यात्रा 🚩

ऊँ श्री अमरा गुरु विजयते राम

ऊँ श्री गुरुचरण कमलेभ्यो नमः

ऊँ श्री गणेशाम्बिकायै नमः

हरि ऊँ गुरूजी

संत मिलन को चालिये, तज मान मोह अभिमान।

ज्यों ज्यों पग आगे धरे, कोटि यज्ञ समान।।

यह तन विष की बेलरी, गुरु अमृत की खान।

शीश दिए गुरु मिले,तो भी सस्ता जान।।

23 मई मंगलवार सवेरे श्री दादाजी महाराज शोभाराम जी रघुवंशी के घर पर विराजमान थे। श्री दादाजी महाराज ने शोभाराम जी रघुवंशी पर रखी अपनी गदा मंगवा कर 8:40 बजे यात्रा का श्रीगणेश किया, रघुवंशी जी के घर से श्री राधा पुरम में लाल बाबा के मंदिर पर श्री दादाजी महाराज पहुंचे, वहां गुरुदेव भगवान ने नारियल एवं हवन सामग्री धूनी में छुड़वायी, लालबाबा से गुरु महाराज ने मंदिर में रखा अपना लोटा मंगवाया तथा बड़ का झोंरा मंगवाया। मंदिर में आए दर्शनार्थी भक्तजनों को प्रसाद वितरित करवाया। इस प्रकार श्री राधा पुरम मंदिर से आगे बढ़े हबीबगंज रेलवे स्टेशन के पास पठा पटेल को आशीर्वाद देकर श्री दादाजी महाराज ने गांव के लिए विदा किया।

श्री दादाजी महाराज के रथ में श्री गुड्डा बाबा, श्री सुरेंद्र सिंह भाटी मालीबांया, कुलदीप भाटी सीगांव और दूसरी गाड़ी में श्री राजकुमार जी पाराशर बेगमगंज, श्री मोहन सिंह जी रघुवंशी शिक्षक बटेरा, श्री अभिषेक जी रघुवंशी सिंहपुर, श्री बृजेंश लोधी किरतपुर न्यू मार्केट से फल लेकर एलबीएस हॉस्पिटल के पास देवी जी के मंदिर पहुंचे। वहां अष्टावक्र जी गुरु जी ने श्री गुरुदेव भगवान का भाव भक्ति से परिपूर्ण सत्कार एवं पूजन किया। श्री गुरुदेव भगवान ने माता जी के हवन कुंड में नारियल तथा हवन सामग्री छुड़वायी, हनुमान जी तथा काली मैया जिस वृक्ष के नीचे विराजमान थे उस पर भक्तों से चुनरी चढ़ावायी । काली माता का त्रिशूल श्री दादाजी महाराज स्वयं ने धारण किया तथा अपना शस्त्र काली माता जी के त्रिशूल के स्थान पर विराजित करवाया। इसके बाद अष्टावक्र जी महाराज से विदाई लेकर लालघाटी में टीआई साहब को श्री दादाजी महाराज ने दर्शन दिए इसके पश्चात दुबे जी, पाठक जी एवं पंडित नितेश जी शर्मा श्री दादाजी महाराज के दर्शन के लिए पहुंचे।

पंडित नितेश शर्मा जी को लालघाटी से साथ लेकर श्री दादाजी महाराज भक्त जनों के साथ कुबेरेश्वर धाम सीहोर पंडित प्रदीप मिश्रा जी के वहां पहुंचे। वहां पर पुलिस वालों को लड्डू प्रसाद वितरित करवाया। इसके पश्चात पप्पू एंड पप्पू रेस्टोरेंट पर भक्तों के भगवान तथा भक्तों ने भोजन प्रसादी पायी। इसके पश्चात गुरुदेव भगवान श्री दादा नरखेड़ा हनुमान मंदिर पर पहुंचे ,पाँच लड्डू का भोग हनुमान जी महाराज को गुरुदेव भगवान ने लगवाया।

इसके पश्चात श्री संकटमोचन महादेव मंदिर विरल गुप्त नर्मदा जलधारा ग्राम देवझिरी जिला झाबुआ शाम को 6:44 बजे श्री दादाजी महाराज भक्त जनों को लेकर पहुंचे।

इस स्थान पर श्री सिंगाजी महाराज ने मां नर्मदा को अपनी भक्ति की शक्ति से बुला लिया। मां को भक्त की करुण पुकार सुनकर आना ही पड़ा। देवझिरी में संकट मोचन महादेव जी का भव्य मंदिर जिसमें श्री हनुमान जी महाराज विराजमान है पास में श्री सिंगाजी महाराज का पादुका मंदिर गोमुख से मां नर्मदा की जलधारा निकली है तथा कुंड बना है।

श्री दादाजी महाराज की कृपा से कुंड में नाग देवता के दर्शन हुए। यहां पर आश्रम में संत माताराम ने भक्तों को चाय प्रसादी पिलवायी। श्री दादाजी महाराज ने देवझिरी से मां नर्मदा का जल बोतलों में भरवा कर साथ लिया। 11:00 डाकोर जी से थोड़ी दूर पहले स्थित एक भोजनालय में सभी ने भोजन प्रसादी पायी, उसी भोजनालय में एक छोटे से कुत्ते को श्री दादाजी महाराज का स्नेह प्राप्त हुआ।

सब में आत्मा रूप स्थित परमात्मा के दर्शन करने वाले परमहंस श्री दादाजी महाराज की लीला उनकी कृपा के बिना नहीं जाने जा सकती विद्या विनय से संपन्न ब्राह्मण कुत्ते, हाथी, गौ और चांडाल को समभाव रुप से दर्शन की विधि जो श्रीमद्भागवत गीता में बताई है उसके प्रत्यक्ष दर्शन भक्तों को प्राप्त हुए।

Paramhans

परमहंस श्रीराम बाबाजी विविध स्वरूपम

इस प्रकार सभी भक्त जन श्री दादाजी महाराज के सानिध्य में मंगलवार 23 मई रात्रि को 11:30 बजे श्री सत्यनारायण भगवान मंदिर राम चौक डाकोर जी पहुंचे। वहां श्री सत्यनारायण भगवान मंदिर के महंत श्री जयराम दास जी महाराज के साथ संतो ने श्री दादाजी महाराज की अगवानी की। श्री जयराम दास जी सरल प्रवृत्ति के सेवाधारी संत है सभी संतों का श्री दादाजी महाराज के प्रति अनुराग भक्ति भाव देखकर सिर श्रद्धा से उनके चरणों में झुक जाता है।

प्रातःकाल 24 मई बुधवार डाकोर जी के श्री सत्यनारायण भगवान मंदिर महंत श्री जयराम दास जी को श्री दादाजी महाराज ने छिंद धाम से लाए हुए घंटे को दे कर श्री सत्यनारायण भगवान मंदिर में लगवाया, श्री सत्यनारायण भगवान को 23 किलो आम, केले और खजूर का भोग लगवाया, श्री दादाजी महाराज की परमहंसी क्रिया में अस्त्र शस्त्र निर्माण हुआ। इसी बीच श्री दादाजी महाराज के परम भक्त भाई लक्ष्मण सिंह परमार पहुंचे,फूल माला से गुरु महाराज का भावमयी पूजन अभिनंदन किया, लक्ष्मण भाई गुरुदेव भगवान के 45 वर्षों से सेवक हैं , लक्ष्मण सिंह जी का संपूर्ण परिवार गुरुदेव भगवान का अनन्य भक्त हैं लक्ष्मण भाई श्री दादाजी महाराज को साक्षात ईश्वर बताते हुए कहते हैं कि मेरे पैर के दो टुकड़े हो गए थे उसके पश्चात ऑपरेशन हुए को तीन दिन हुए थे कि श्रीदादा जी महाराज उन्हें द्वारिका अपने साथ ले गए। लक्ष्मण सिंह जी आगे बताते हैं कि उनकी यात्रा में उन्हें बिल्कुल भी तकलीफ नहीं हुई दादा जी महाराज का चमत्कार देखकर आश्चर्य होता है।

इसके पश्चात श्री दादाजी महाराज ने सभी भक्तों को डाकोर जी के राजा रणछोड़ मंदिर दर्शन का आदेश देते हुए कहा कि गोमती घाट पर गौओं और मछलियों को आटा खिलाना। गोमती घाट के किनारे सुंदर मंदिर बने हुए हैं श्री दादाजी महाराज के आदेश अनुसार सभी भक्तों ने मछलियों तथा गौओं को आटा खिलाया। रणछोड़ भगवान के दर्शन के पश्चात सभी भक्तों ने बाल भोग पाया इसके बाद श्री बलराम जी मंदिर में दर्शन कर गौशाला देखी। इसके बाद सभी भक्त श्री सत्यनारायण भगवान मंदिर में गुरुदेव के पास पहुंचे।

भोजन प्रसादी उपरांत श्री दादाजी महाराज ने गलतेश्वर महादेव मंदिर दर्शन के लिए आदेश दिया महादेव मंदिर डाकोर जी से 16 किलोमीटर दूर सोलंकी युग का एक शिव मंदिर है जो माही और गलता नदियों के संगम पर स्थित है प्राचीन काल में गालव ऋषि यहां रहते थे गलतेश्वर महादेव मंदिर पहुंचने पर श्री दादाजी महाराज ने आश्रम में स्थित प्राचीन धूने के चारों और 23 घी के दीपक प्रज्वलित करवाएं , हवन सामग्री धूने में भक्तों द्वारा छुड़वाई तथा दर्शनार्थियों को लड्डू प्रसाद वितरित करवाया। गलतेश्वर महादेव मंदिर दर्शन के पश्चात श्री दादाजी महाराज भक्तों को लेकर श्री सत्यनारायण भगवान मंदिर राम चौक डाकोर जी पहुंचे।

विश्राम उपरांत श्री दादाजी महाराज ने गोमती घाट रणछोड़ जी के मंदिर के सामने मुंडन करवाया। श्रीसत्यनारायण भगवान मंदिर की आरती के पश्चात भक्तों ने भोजन प्रसादी पाकर रात्रि विश्राम श्री दादाजी महाराज के सानिध्य में श्री सत्यनारायण भगवान मंदिर डाकोर जी में किया।

प्रातःकाल 25 मई गुरुवार श्री शोभाराम जी रघुवंशी उनके दो पुत्र ,छोटे भाई तथा श्रीलाल बाबा भोपाल से डाकोर जी पहुंचे। गुरुदेव भगवान ने सभी भक्तों को एक एक मुट्ठी खिचड़ी दी जिसमें सिक्के भी थे सिक्कों में से पांच के सिक्के निकला कर और खिचड़ी सभी भक्तों से श्री दादाजी महाराज ने वापस ले ली । श्री दादाजी महाराज ने 7 किलो पेड़ा, तीन किलो सेब तथा 3 किलो संतरा का भोग श्री सत्यनारायण भगवान को लगवाया।गुरु पुष्य नक्षत्र गुरुवार श्री दादाजी महाराज ने श्री सत्यनारायण भगवान में सत्यनारायण भगवान की कथा 5 भक्तों को यजमान बनाकर करवाई। कथा आरंभ करवाकर श्री दादाजी महाराज गोमती घाट श्री हनुमान जी महाराज के मंदिर में पहुंचे श्री दादाजी महाराज ने धूनी में हवन सामग्री तथा घी छुड़वाया। श्री हनुमान जी महाराज से बर्तन की अदला बदली की तथा पांच दीपक जलवाए। हनुमान जी महाराज को पेड़ा लड्डू और बर्फी का भोग लगवाया। मंदिर में कपड़ों से रस्सी बनाकर स्वयं के गले में श्री दादाजी महाराज ने धारण की। इसके पश्चात श्री दादाजी महाराज श्री सत्यनारायण भगवान मंदिर कथा में पहुंचे एक अद्भुत बात थी कि श्री दादाजी महाराज आरती से थोड़े समय पूर्व पहुंचे।

आरती पश्चात संत भगवान और ब्राह्मण देवता पधारे। इसी बीच एक भजन गायिका भक्त गुरु महाराज के पास सरस्वती मैया का आशीर्वाद मांगने आई ।भजन गायिका के पास काली चुनरी थी, श्री दादाजी महाराज ने काली चुनरी लेकर लाल चुनरिया माता राम को आशीर्वाद स्वरुप दी। संतों का तिलक, फूल और दक्षिणा द्वारा श्री दादाजी महाराज ने अभिनंदन करवाया। उसके पश्चात श्री सत्यनारायण भगवान को भोग लगवाया ,भगवान के भोग के पश्चात भंडारा प्रारंभ हुआ ।भंडारे में देवझिरी से लाया गया मां नर्मदा का जल श्री गुरुदेव भगवान ने डलवाया, भंडारे में सब्जी, पूड़ी, आमरस, दाल और महाप्रसाद(चावल) था। भंडारे के साथ ही डाकोर जी की रीति के अनुसार ब्राह्मणों तथा संतो को दक्षिणा तथा गमछा दिया गया। संतो ब्राह्मणों तथा गुरु भगवान के भोजन के उपरांत सभी भक्तों ने भोजन प्रसादी पाई।

Shrirram babajee

विश्राम उपरांत श्री दादाजी महाराज ने सभी भक्तों को बुलाया। दो गाड़ियों को वापस मध्य प्रदेश जाने की आज्ञा देखकर गुरु भगवान ने भगवान द्वारकाधीश की नगरी द्वारिका के लिए प्रस्थान किया । आगे की यात्रा के लिए श्री दादाजी महाराज की सेवा में पंडित नितेश जी शर्मा, सुरेंद्र सिंह भाटी, कुलदीप भाटी थे।

शाम 6:30 बजे के आसपास श्री दादाजी महाराज चामुंडा माताजी मंदिर चोटीला पहुंचे। माताजी मंदिर के पश्चात 7:45 बजे 52 हनुमान मंदिर नानी मोलड़ी श्री चैतन्य हनुमान जी महाराज पहुंचे। श्री दादाजी महाराज ने एक दीपक हनुमान जी महाराज के मंदिर में तथा एक दीपक शंकर भगवान के मंदिर में प्रज्वलित करवाया, भक्तों को लड्डू बर्फी प्रसाद दिया तथा हनुमान जी के मंदिर से रोटी ली इसके पश्चात रात्रि में 22:32 बजे होटल तुलसी रेजीडेंसी बेड़गांव में गुरुदेव भगवान ने रात्रि विश्राम किया। भक्तों ने भोजन प्रसादी पाई तथा श्री दादाजी महाराज ने छाछ ली।बची हुई छाछ को तसले में रखवाया।

प्रातः काल 26 मई शुक्रवार को बेड़गांव से 6:52 बजे यात्रा का आरंभ श्री दादाजी महाराज ने किया।8:50 बजे श्री चैतन्य हनुमान जी महाराज श्री फाफेड़ा हनुमानजी मंदिर (जामनगर जिला)पर पहुंचे। वहां पर श्री दादाजी महाराज ने गायों को डाकोर जी के हनुमान जी मंदिर से लाए हुए तसले में छाछ तथा बावन हनुमान जी मंदिर नानी मोलड़ी से लाई हुई रोटी ,लड्डू एवं बर्फी खिलवायी। फाफेड़ा हनुमान जी मंदिर में श्री दादाजी महाराज ने हवन कुंड में हवन सामग्री और नारियल छुड़वाए,श्री सत्यनारायण भगवान मंदिर डाकोर जी से लाए हुए घंटे को फाफेड़ा हनुमान जी मंदिर डाकोर जी के हनुमान मंदिर में बनी रस्सी से बंधवा कर लगवाया । यहां एक महात्मा जी रहते हैं उनके पास 5-6 गौ माता, एक कुत्ता तथा एक अश्व हैं। यहां गौ माता का मंदिर भी हैं ,महात्मा जी बता रहे थे कि श्री दादाजी महाराज समय-समय पर यहां आते रहते हैं महात्मा जी ने हम सभी को चाय प्रसादी दी,गुरू महाराज ने महात्मा जी को एक कुर्ता, गमछा तथा पंचा पहनाया, पेड़ा एवं बर्फी प्रसाद दिया। महात्मा जी की बिल्ली के साथ श्री दादाजी महाराज का स्नेह देखकर श्री रामचरितमानस की चौपाई सिया राम मय सब जग जानी चरितार्थ होती हुई दिखी। इसी समय श्री दादाजी महाराज की अमृतवाणी गुंजायमान हुई 🌸संत मिले अनुकूल तो बरसे फूल ही फूल, संत मिले प्रतिकूल तो शूल ही शूल। श्री दादाजी महाराज ने यहां से नक कटा हंसिया , लोहे का डंडा तथा झंडा लिया ।

9:14 बजे शंकर स्वरूप गुरु भगवान के साथ श्री नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के लिए यात्रा आरंभ हुई।9:52 बजे श्री दादाजी महाराज के सानिध्य में भजन करते हुए भक्त नागेश्वर पहुंचे। नागेश्वर में श्री गुरुदेव भगवान की आज्ञा अनुसार अभिषेक करवाया ,नागेश्वर में भगवान शंकर और पार्वती की नाग नागिन रूप में पूजा होती हैं। अभिषेक के पश्चात भगवान शिव के अभिषेक की मालाएं शिव स्वरूप गुरु महाराज को अर्पित कर भक्तों ने जीवन लाभ लिया। स्मृति स्वरूप गुरुदेव भगवान के साथ फोटो खींच खिंचवायें और बाल भोग प्राप्त किया।

श्री दादाजी महाराज महादेव मंदिर गोपी तालाब पहुंचे , गोपी तालाब पर श्री दादाजी महाराज ने गायों को फाफड़ा खिलाया तथा बाल गोपालों को पेड़ा प्रसाद दिया गोपेश्वर महादेव के दर्शन के पश्चात गोपी चंदन लिया श्री दादाजी महाराज के भक्त के निवेदन पर सभी ने चाय प्रसादी ली। गोपी तालाब से श्री दादाजी महाराज भेंट द्वारिका पहुंचे। भेंट द्वारिका से चमत्कारी हनुमान जी मंदिर मीठापुर में दो आम का भोग श्री दादाजी महाराज ने लगवाया। इसके पश्चात रुकमणी मैया के मंदिर श्री दादाजी महाराज पहुंचे श्री दादाजी महाराज ने माला,आम की टोकरी ,पेड़ा और भक्तों से लिए पांच पांच के सिक्के रुकमणी मैया को अर्पित किया। रुकमणी मैया के मंदिर में पंडा जी ने श्री दादाजी महाराज को मंदिर का झंडा लाकर दिया श्री दादाजी महाराज ने पंडाजी को दक्षिणा दी।,पक्षियों को लड्डू बर्फी डलवायी इसके पश्चात श्री दादाजी महाराज भगवान द्वारकाधीश की नगरी द्वारका पहुंचे। समुद्र किनारे सीताराम आश्रम खाक चौक राम घाट संत श्री दामोदर दास जी महाराज के यहां पहुंचे। समुद्र किनारे रामघाट पर श्री दादाजी महाराज ने गायों को नागेश्वर से लाये हुए जलेबी और खमण खिलवाया। संत श्री दामोदर दास जी महाराज राजस्थान के कोटा जिले में ग्राम धोरी तहसील दीगोद में श्री राम कथा एवं नव दिवसीय पंचकुंडात्मक श्रीराम महायज्ञ करवाने गए हैं, आश्रम में उपस्थित सेवादार माताजी ने श्रीदादाजी महाराज को बताया। श्री दादाजी महाराज गाड़ी में ही विराजमान थे।श्री दादाजी महाराज और भक्तों ने भोजन प्रसादी पाई। आश्रम की सेवादार ममतामयी माताजी ने प्रेम पूर्वक भोजन पवाया तथा आश्रम के दर्शन करवाये । बड़ा सुंदर सीताराम आश्रम बना हुआ है आश्रम की दीवारों पर श्री रामचरितमानस की चौपाइयां लिखी हुई है जो कि हमारी यात्रा की प्रासंगिकता पर थी जो इस प्रकार थी

अब मोहि भा भरोस हनुमंता।

बिनु हरि कृपा मिलें नहीं संता।।

सनमुख होहिं जीव मोहि जबहिं।

जन्म कोटि अघ नासहिं तबहिं।।

सुनु भरत भावी प्रबल, बिलख कहे मुनि नाथ।

हानि लाभ, जीवन मरण ,जसु अपजसु विधि हाथ।।

तुम्ह कृपाल जा पर अनुकूला।

ताहि न ब्याप त्रिविध भवसूला।।

सीताराम राम चरन रति मोरें।

अनुदिन बढई अनुग्रह तोरें।।

राम कृपा दिखला दे तो संत कृपा हो जाती हैं संत कृपा दिखला दे तो भगवंत कृपा हो जाती है।

सीताराम आश्रम के पश्चात गुरुदेव भगवान ने समुंद्र किनारे द्वारका नगरी द्वारका रेलवे स्टेशन भीतरी द्वारका शहर के दर्शन करवायें । इसके पश्चात गुरुदेव भगवान ने समुंद्र किनारे एक होटल में विश्राम किया किया हम लोगों ने गोमती नदी में स्नान किया तथा गुरुदेव भगवान की आज्ञा अनुसार गाड़ी में रखी समस्त भोजन सामग्री गायों और कुत्तों को खिला दी। समुंद्र किनारे गोमती नदी पर विशाल घाट , भव्य पुल, विशाल एवं शिल्प कला से भरपूर भगवान श्री द्वारकाधीश का मंदिर अद्भुत दृश्य का निर्माण करता है।

गुरुदेव भगवान की आज्ञा ले कर भगवान द्वारकाधीश के दर्शन के लिए गए विशाल परकोटा एवं मुख्य द्वार से श्री द्वारकाधीश भगवान के मंदिर में प्रवेश किया उस समय प्रवेश थोड़ी देर के लिए बंद था क्योंकि द्वारकाधीश भगवान के भव्य मंदिर के झंडे को दिन में 5 बार बदला जाता है, झंडा लगवाने वाले भक्तों को ₹200000 देने पड़ते हैं 2 साल की एडवांस बुकिंग चल रही है। काफी देर लाइन में लगने के पश्चात भगवान द्वारकाधीश दर्शन प्राप्त हुए मानो जीवन लाभ आज ही प्राप्त हुआ है। भगवान द्वारकाधीश के दर्शन हमारी आंखों को ललचाते रहे लेकिन पुजारियों की समय की प्रतिबद्धता भी प्रणम्य थी हमारी यात्रा इसलिए भी अद्भुत थी भगवान ही हमें भगवान के दर्शन करवा रहे थे। भगवान के दर्शन के पश्चात दुर्वासा ऋषि मंदिर के दर्शन किए उनके पश्चात आदि गुरु शंकराचार्य जी की शारदा पीठ के दर्शन किए ।उसके पश्चात गुरुदेव भगवान के पास पहुंचे।

भगवान द्वारकाधीश की नगरी द्वारिका से शाम 7:23 बजे भगवान सोमनाथ की नगरी प्रभास पाटन के लिये श्री दादाजी महाराज की यात्रा आरंभ हुई। रात्रि 8:14 बजे हरसिद्धि माताजी श्री दादाजी महाराज पहुंचे। पुजारी जी ने बताया हरसिध्दि माताजी उज्जैन शक्तिपीठ है और हरसिद्धि माता जी का यह स्थान सिद्ध पीठ है। बवासीर के रोगियों के लिए यहां माताजी के मंदिर में एक ताबीज दिया जाता है जिसे चांदी के अंगूठी में मंगलवार या रविवार को धारण करने पर रोगी को आराम मिलता है। श्री गुरुदेव भगवान ने यहां होटल से नाश्ता एवं कढी मंगवाया। रात्रि 11:45 सोमनाथ पहुंचे। होटल में विश्राम किया। संत ,सती और सूरमा की धरती सौराष्ट्र के वेरावल बंदरगाह पर स्थित सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की स्थापना स्वयं भगवान चंद्रमा ने दक्ष प्रजापति द्वारा दिए गए श्राप से बचने के लिए की थी। भगवान सोमनाथ मंदिर को 17 बार आक्रमणकारियों ने तोड़ा जिसकी रक्षार्थ भीमराज सोलंकी तथा हमीर सिंह जी गोहिल जैसे हजारों वीरों द्वारा आत्मोत्सर्ग किया गया लेकिन उन विदेशियों को क्या पता कि पाषाण के शिवलिंग को तोड़ सकते हो लेकिन हमारी आत्मा में स्थित आत्म ज्योतिर्लिंग को तो तोड़ना तो दूर तुम उसे देख भी नहीं सकते यही तो सनातन की शक्ति है लेकिन इतने बड़े भारत राष्ट्र की धार्मिक चेतना पर यह तांडव किस कारण से हुआ इसका मंथन हमें करना चाहिए तथा आगे कभी ऐसा ना हो इसके लिए हमारे राष्ट्र की सत्ता के सिंहासन पर किसे बैठाना है ताकि हमारी धर्म और संस्कृति सुरक्षित रहे इसका हमें ध्यान रखना हैं। 27 मई शनिवार सवेरे 8:00 बजे करीब श्री दादाजी महाराज सोमनाथ मंदिर पहुंचे वहां छोटी सी शक्ति स्वरूपा कन्या ने श्री दादाजी महाराज को तिलक चंदन किया, इसके पश्चात श्री गुरुदेव भगवान की आज्ञा से सोमनाथ भगवान के दर्शन के लिए हम गये। मंदिर की भव्यता, शिल्पकारिता ,स्वच्छता बहुत अच्छी थी भगवान सोमनाथ के दर्शन पश्चात समुद्र दर्शन किया। अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य, वास्तुशिल्प तथा ईश्वरी चेतना युक्त भगवान सोमनाथ मंदिर दर्शन कर आत्मिक संतुष्टि प्राप्त हुई । भगवान सोमनाथ दर्शन के पश्चात शंकर स्वरूप श्री गुरुदेव भगवान को फूल आक और पुष्पों की मालायें अर्पित कर मानसिक पूजन किया ।हम लोग गुरु महाराज के पास पहुंचे तब तक दीनदयाल गुरुदेव भगवान को याचक समुदाय ने घेर लिया था, गुरु महाराज ने याचकों को चीकू फल वितरित करवाये ।

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भगवान सोमनाथ के मंदिर से श्री गुरुदेव भगवान गोलोक तीर्थ धाम पहुंचे , इस स्थान पर भगवान श्री कृष्ण भगवान का अंतिम संस्कार हुआ था। हिरण नदी के किनारे गोलोक धाम तीर्थ की नारियल वृक्षों से आच्छादित प्राकृतिक छटा अद्भुत है। यहां गीता मंदिर संगमरमर के पत्थर से बना है जिसके खम्भों पर श्रीमद्भगवद्गीता 18 अध्याय लिखे गए हैं भगवान श्री कृष्ण की त्रिभंगी मुद्रा में मूर्ति विराजित है , पास में श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर है इसमें भगवान नारायण, लक्ष्मी जी तथा गरूड़ जी विराजमान है। लक्ष्मी नारायण भगवान के मंदिर के पास प्रसिद्ध कृष्ण भक्त हरिहर महाप्रभुजी की बैठक , बलदेवजी मंदिर,सोमनाथ महादेव जी मंदिर और शेष अवतार मंदिर है। इस स्थान के मध्य खुले प्रांगण में श्री कृष्ण भगवान का पादुका मंदिर है। यहां श्री गुरुदेव भगवान ने बिल्लियों को दुलारा तथा पक्षियों को दाना डलवाया।

इसके पश्चात कपिला ,हिरण और सरस्वती नदी के संगम पर श्री गुरुदेव भगवान पहुंचे ,गुरुदेव भगवान की आज्ञा अनुसार हमने मछलियों को आटा बिस्कुट तथा गायों को हरा चारा खिलाया और अल्पाहार किया ।श्री गुरुदेव भगवान ने जलेबी प्रसाद बुलवाया। इसके पश्चात श्री गुरुदेव भगवान भालका तीर्थ पहुंचे जहां जरा नामक शिकारी ने भगवान श्री कृष्ण के पैर में पद्य चिन्ह को हिरण की आंख समझकर तीर मारा था। यहां भगवान श्रीकृष्ण की अर्ध विश्राम में मूर्ति है जिसके सामने शिकारी जरा हाथ जोड़कर क्षमा मांगने की मुद्रा में खड़ा है पास में महादेव जी मंदिर है।यहां गुरुदेव भगवान ने जलेबी वितरित करवायी।जिस प्रकार रामेश्वर तीर्थ भगवान श्री राम और शंकर भगवान की लीला स्थली है उसी प्रकार सोमनाथ तीर्थ भगवान नटवर तथा नटराज का मिलन स्थल है।

10:30 बजे भालका तीर्थ से श्री गुरुदेव भगवान ने जूनागढ़ श्री दत्त भगवान की नगरी की ओर प्रस्थान किया रास्ते में आम, जामुन और बेर लिये।12:09 बजे जूनागढ पहुंचे , जूनागढ़ में श्री गुरुदेव भगवान ने दत्तात्रेय भगवान के मंदिर जाने वाली सीढ़ियों पर हनुमान जी महाराज को नारियल का भोग लगवाया फिर एक दुकान से एक गन्ना लिया जिसमें 23 गांठे थी ।7,8 और 9 गांठों की तीन लकड़ी ली की गांठों का जोड़ 24 था जो दत्तात्रेय भगवान के 24 गुरुओं की प्रतीक थी। श्री दादाजी महाराज ने दत्त भगवान मंदिर के पास दुकान से कमंडल और अन्य सामग्री ली । दोपहर 1:42 बजे जूनागढ़ से डाकोर जी के लिए श्री दादाजी महाराज ने प्रस्थान किया। राजकोट के समीप सप्त हनुमान जी मंदिर में श्री दादाजी महाराज ने नारियल, 5 आम तथा जामुन का भोग लगवाया । शाम को डाकोर राजकोट मार्ग पर स्थित डोलिया ग्राम में श्री दादाजी महाराज के सानिध्य में विश्व प्रसिद्ध गिर गौ माता के समूह के दर्शन हुए। बपरोला नामक स्थान पर श्री गुरुदेव भगवान के अनन्य भक्त सूरसिंह जी (शिक्षक )पालीताणा भावनगर से पहुंचे, भक्त और भगवान का आत्मिक मिलन वंदनीय है, भगत जी को श्री दादाजी महाराज ने जामुन और आम प्रसादी दी।

नाडियाद हो कर श्रीदादाजी महाराज 27 मई शनिवार को करीब 11:00 बजे डाकोर जी श्री सत्यनारायण मंदिर पहुंचे। श्री सत्यनारायण मंदिर में सुंदरकांड संपूर्ण हुआ था और श्री चैतन्य हनुमान जी महाराज पहुंच गए। श्री गुरुदेव भगवान के पहुंचने पर महंतश्री जयराम दास जी स्वयं द्वार पर पहुंचकर स्वागत किया श्री दादाजी महाराज ने हनुमान जी महाराज को 5आम और जामुन का भोग लगवाया। महंत जी ने श्री दादाजी महाराज के लिए दूध एवं खिचड़ी मंगवाई रात्रि11:30 बजे संतो द्वारा श्री दादाजी महाराज के प्रति सेवा भाव वंदनीय है। प्रातःकाल 6:00 बजे 28 मई रविवार श्री दादाजी महाराज के दर्शन कर श्री सत्यनारायण भगवान की आरती में शामिल हुए श्री दादाजी महाराज ने कहा कि छत पर चीकू लेकर बंदरों को भोग लगाओ कि मैं थोड़े समय पूर्व ही ऊपर से आया था लेकिन मैं बंदरों को नहीं देख पाया अंतर्यामी श्री दादाजी महाराज की लीला अद्भुत है ऊपर बंदर थे।

श्री सत्यनारायण मंदिर में एक दंडी स्वामी जी रुके हुए थे सवेरे श्री दादाजी महाराज के अस्त्र शस्त्र निर्माण हो रहा था तब दर्शन को पधारे ,दंडी स्वामी जी और श्री दादा जी महाराज का सत्संग हुआ। दंडी स्वामी जी ने श्री दादाजी महाराज के दर्शन पाकर कहा कि संत भगवान के दर्शन हुए अब पूरे जीवन मंगल ही मंगल है। फिर दंडी स्वामी जी बोले भगवान सब में आत्मा रूप में रमा हुआ है किसी रूप में दर्शन देते हैं। दंडी स्वामी जी से नर्मदाखंडी श्री दादाजी महाराज ने कमंडल अदला बदली की और दक्षिणा दी।

इसके बाद श्री दादाजी महाराज श्री दादूराम महाराज जो एक उच्च कोटि के संत थे जिन्होंने शंकराचार्य जी के सामने गोमती घाट डाकोर जी के जल पर चलकर अपने योग बल का परिचय दिया था। उनके जन्म स्थल चलाली गांव में श्री दादूराम जी आश्रम पर महंतजी की चादर विधि कार्यक्रम में पहुंचे। साथ में डाकोर जी से श्री सत्यनारायण के महंत श्री जयराम दास जी ,लक्ष्मण सिंह जी और डाकोर जी के संत और महंत थे। कार्यक्रम स्थल श्री दादू राम जी चलाली गांव पहुंचने पर संतों महंतों ने श्री दादाजी महाराज का स्वागत किया ।कई संत भगवान श्वेत एवं भगवा वस्त्रों में अपने-अपने स्थान पर विराजमान थे यज्ञ का आयोजन हो रहा था ।श्री दादा जी महाराज के लिए श्री दादूराम जी मंदिर के ठीक सामने विशेष व्यवस्था की गई थी। मंत्रोचार के साथ यज्ञ नारायण की पूर्णाहुति के बाद आरती हुई। आरती पश्चात सद्गुरु श्री दादूराम जी आश्रम चलाली महंत के रूप में भगवानदास जी महाराज के नाम की उद्घोषणा हुई। श्री भगवानदास जी को संत सभा में गादी के पास बैठाया गया डाकोर रणछोड़ जी मंदिर के पुजारी परिवार के सदस्य ब्राह्मण देवता ने श्री भगवानदास जी का तिलक किया। इसके पश्चात सभी प्रमुख संतों ने हाथ पकड़कर श्री भगवान दास जी महाराज को गुरुगादी पर बैठाया , उसके पश्चात सर्वप्रथम नव महंत संत भगवान दास जी के गुरु श्री दयाराम जी(महंत श्री दादूराम जी आश्रम डाकोर मुख्य पीठ)ने शिष्य को तिलक लगाकर माला पहनाई तथा चादर ओढ़ायी । श्री दयाराम जी महाराज के पश्चात सभी संतो ने श्री भगवान दास जी महाराज को चादर ओढ़ायी। श्री दादाजी महाराज द्वारा श्री भगवानदास जी महाराज का अभिनंदन हुआ। संतो के पश्चात भक्तों द्वारा श्री भगवान दास जी महाराज का तिलक अभिनंदन किया गया। इसके पश्चात संतों के प्रवचन हुए।

चादर विधि के पश्चात नव महंत श्री भगवान दास जी ने अपने गुरु श्री दयाराम जी को दण्डवत कर आशीर्वाद लिया, इसके बाद श्री दादूराम जी आश्रम के मंदिर में दंडवत कर आशीर्वाद लिया। मंदिर में दंडवत के पश्चात नव महंत श्री भगवान दास जी महाराज ने सद्गुरुदेव श्री दादाजी महाराज को प्रणाम कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके पश्चात श्री भगवानदास जी ने सभी संतो को दंडवत कर आशीर्वाद लिया। इसके बाद आरती हुई

जय काना काला, प्रभु नटवर नंदलाला

मीठी मुरली वाला, जय काना काला

  • आरती पश्चात भोजन प्रसादी हुई। भोजन प्रसादी के बाद डाकोरजी श्री दादूराम आश्रम गुरु गादी के मुख्य महंत श्री दयाराम जी (जो आज नव महंत बने उनके गुरु) श्री दादाजी महाराज के पास आए तथा विनम्रता पूर्वक बोले कृपा दृष्टि बनाए रखना जब जब आओ तब एक रात यहां भी रुकना, फिर श्री दयाराम जी महाराज लक्ष्मण सिंह बापू की तरफ मुख करके बोले कि मैंने भावना करी थी कि श्री दादाजी महाराज चादर विधि कार्यक्रम में पधारे तो वो आ गए।

अद्भुत लीला गुरू सदैव अमर होते हैं यह सुना था लेकिन आज प्रत्यक्ष अनुभव किया सदगुरुदेव श्री दादूराम जी महाराज की फोटो देखी तो सदगुरुदेव परमहंस श्री टाटम्बरी गुरु महाराज अमराझिरी आश्रम ऊंचा खेड़ा स्वयं बैठे हैं। अमराझिरी वाले गुरु महाराज कहते थे कि गुरु नाम हरि, हरि नाम गुरू। जो अंधकार से प्रकाश में ला दे वह गुरु है इस बात का अनुभव किया।

मंडला में श्री दादाजी महाराज द्वारा श्रीजमदग्नि ऋषि के हवन कुंड यज्ञ कार्यक्रम में अखंड मंडलाकार गुरु सत्ता का अनुभव किया था आज उनकी कृपा से श्री दादूराम जी आश्रम चलाली में वही अनुभव पुनः प्राप्त किया।

गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके के लागू पाय।

बलिहारी गुरु आप की, गोविंद दियो दिखाय।।

वंदे गुरु परंपरा🙏

श्री दादूराम जी आश्रम चलाली से विदाई ले कर श्री दादाजी महाराज डाकोर जी सत्यनारायण भगवान मंदिर पहुंचे। डाकोर जी में विश्राम के पश्चात शाम 4:30 बजे डाकोर जी श्री दादाजी महाराज ने प्रस्थान किया।शाम 5:15 बजे सूर्यवंशी राठौड़ योद्धा भायथी जी महाराज के मंदिर फागवेल नामक स्थान पर पहुंचे, 700 साल पहले श्री भायथी जी राठौड़ मुगलों से गौ रक्षार्थ युद्ध करते हुए वीरगति प्राप्त हुए थे, मंदिर में श्री दादाजी महाराज ने माला तथा नारियल चढवाया ।यहां से श्री दादाजी महाराज ने 7 फूल मालाएं तथा 52 समोसा लिए।

शाम 6:00 बजे शाश्वत हनुमानजी मंदिर 61 चौकी पर श्री चैतन्य हनुमान जी महाराज ने जामुन ,2 आम का भोग लगवाया तथा माला अर्पित की। पुजारी जी को शाल भेंट की। इसके बाद श्री दादाजी महाराज रामकुंड दुआ टिमा पहुंचे जहां क्रमशः गर्म तथा ठंडे जल के 108 कुंड बने हुए हैं जिन में सफेद, नीला तथा हरा जल है। जहां विज्ञान थक जाता है अध्यात्म वहीं से शुरू होता है। रामकुंड के एक तरफ छोटे से टिले पर श्री राम जानकी मंदिर हैं दूसरी तरफ छोटे से टीले पर सोमनाथ महादेव मंदिर हैं स्थानीय लोग इस स्थल को भीम हिडिंबा विवाह स्थल भी बताते हैं पत्थर की भीम पादुका विराजमान है। इस प्रकार श्री दादाजी महाराज के सानिध्य में सत्संग करते हुए रात्रि में बड़नगर के पास उन्हेल मार्ग पर बालोदा कोरन भाटी परिवार के निवास पर रात्रि 1:30 बजे बारिश के बीच पहुंचे । 29 मई सोमवार श्रीकृष्ण भक्त भाटी परिवार के यहां से श्री दादाजी महाराज ने सवेरे 6:00 बजे विदाई ली। प्रस्थान के समय परिवार के मंदिर में आरती हो रही थी मंदिर में श्री दादा जी महाराज द्वारा पुष्प माला अर्पित की गई, गुरुदेव भगवान ने तिलक चंदन किया।

उन्हेल मार्ग पर भेड़ बकरी चराने वाले एवं घुमंतु परिवार को श्री दादाजी महाराज ने समोसा वितरित करवाया। इसके पश्चात गौ माताओं को समोसा प्रसाद खिलाया । इसी बीच श्री दादाजी महाराज की अमृतवाणी गुंजायमान हुई दया धर्म का मूल है, पाप मूल अभिमान। उन्हेल में बालभोग पाया। उन्हेल से उज्जैन मार्ग पर श्री दादाजी महाराज पंडित मृत्युंजय हीरेमठ जी द्वारा गाई गई शिव स्तुति का आनंद लेते हुए उज्जैन मंगलनाथ महादेव जी मंदिर पहुंचे। मंगलनाथ महादेव जी मंदिर में उपस्थित सभी ब्राह्मणों को श्री दादाजी महाराज ने ₹100 दक्षिणा नवीन संसद भवन के उद्घाटन के उपलक्ष में दी गई, ब्राह्मणों द्वारा श्री गुरुदेव भगवान की स्तुति की गई।

मंगल ग्रह भूमि और भवन का कारक हैं इसलिए दयालु गुरुदेव भगवान द्वारा नवीन संसद भवन के उद्घाटन उपलक्ष में मंगल ग्रह के जन्मस्थान मंगल नाथ महादेव मंदिर के पुजारी ब्राह्मणों को संतुष्ट कर नवीन संसद का मंगल कराया गया। परम पूज्य ब्रह्मलीन परमहंस सदगुरुदेव श्री टाटम्बरी गुरू महाराज अमराझिरी कहते थे कि भगवान की लीला और संतों की महिमा अपरम्पार है श्री दादाजी महाराज के सानिध्य में हमें यह प्रत्यक्ष देखने को प्राप्त हुआ श्री दादाजी महाराज की परमहंसी लीला को कौन जान सकता है लेकिन श्री दादाजी महाराज के चरणों का ध्यान कर के दास यह लिख रहा है। बालक की तोतली बोली पर माता-पिता प्रसन्न होते हैं वैसे ही दास की लेखनी की त्रुटी को श्री गुरुदेव भगवान क्षमा करें क्योंकि श्री गुरुदेव भगवान का जीवन चरित्र शब्दों में नहीं समा सकता।

मंगलनाथ महादेव मंदिर से श्री दादाजी महाराज भर्तहरी गुफा पहुंचे । भर्तहरी गौशाला में श्री दादाजी महाराज ने गायों को हरी घास खिलवायी । भर्तहरि मंदिर दर्शन कर गुरुदेव भगवान के पास पहुंचे। मंदिर में उनके गुरु गोरखनाथ जी का धूना एवं मंदिर है। भर्तहरी जी की मूर्ति गुफा में विराजमान है काल भैरव ,काली जी एवं शिवलिंग विराजित है। भर्तहरि गुफा से श्री दादाजी महाराज संस्कृत पाठशाला रामघाट पहुंचे , दादा जी महाराज ने चीकू,जामुन और आम प्रसाद दिया तथा संस्कृत पाठशाला के विद्यार्थियों को ₹100-₹100 दक्षिणा दी ।गायों को फल प्रसादी खिलाई।

इसके पश्चात राम घाट पर शिप्रा मैया में हमने स्नान कर दाल बाफला भोजन प्रसादी पाई 10:30 बजे श्री दादाजी महाराज ने बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन से प्रस्थान किया। सोनकच्छ और आष्टा के बीच में श्री दादाजी महाराज ने नवीन मकान के उद्घाटन तथा सत्यनारायण भगवान की कथा का आदेश दिया । आष्टा में श्री दादाजी महाराज ने पंडित नितेश जी शर्मा को दक्षिणा दिलवा कर बस में बैठाया । करीब 3:15 बजे आष्टा से सीगांव श्री दादाजी महाराज पहुंचे । इतनी लंबी यात्रा से लौटे लेकिन श्रीदादाजी महाराज ने थोड़ा सा विश्राम कर अस्त्र-शस्त्र निर्माण शुरू करवा दिया। आम के झोंरे बुलाकर मुख्य द्वार पर श्री दादाजी महाराज ने बंधवाया , उत्तर पूर्व दिशा में श्री राम जानकी जी ,लक्ष्मण जी एवं पवन पुत्र हनुमान विराजित ध्वज को विराजमान करवाया। खिचड़ी में से सभी को एक एक मुट्ठी दे कर उस में से पांच के सिक्के अलग निकलवाए खिचड़ी वापस ली। खिचड़ी बनाने का आदेश दिया तथा ढोल वाले को पांच के सिक्के दिये गये ।

शाम को श्री गुरुदेव भगवान ने स्नान कर रुकमणी माताजी मंदिर के ध्वज में से गुलाबी वस्त्र निकालकर धारण किया। एक अलमारी में श्री दादाजी महाराज ने नागेश्वर ज्योतिर्लिंग से लाया गया डमरु , शंख,दत्त भगवान के यहां से लाया गया कमंडल, दंडी स्वामी जी का कमंडल विराजित किए। अलमारी के बीच वाले खाने में हनुमान जी मंदिर डाकोर जी के कटोरे में गेहूं,उसके ऊपर तुम्बडिया के पात्र में चावल, उसके ऊपर नारियल के कटोरे में चने की दाल उसके ऊपर चौमुखा घी का दीपक प्रज्वलित किया और पास में एक मिट्टी का कलश रखा। दीपक की तरफ श्री दादाजी महाराज द्वारा निर्मित अस्त्र सेंगोल को विराजित किया गया जबकि दूसरी तरफ काली माता का त्रिशूल, फाफेड़ा हनुमानजी मंदिर से लायी गयी सामग्री से निर्मित शस्त्र को विराजित किया गया ।

श्री दादाजी महाराज महाराज की परमहंसी पूजन विधि उनके सेवकों को परमानंद प्रदान करती हैं जबकि नए लोगों के लिए ये चीजें कौतुक का विषय बन जाती है लोगों को यह चीजें कमंडल, शंख ,डमरु ,शस्त्र ,दीपक दिखाई देते हैं जबकि इन चीजों के रूप में अलग-अलग स्थानों के देवता

विराजित रहते हैं।

श्री दादाजी महाराज का परमहंसी पूजन, साथ में श्री रामायण जी की चौपाई के साथ श्री राम जय राम जय जय राम का कीर्तन तो दूसरी तरफ पंडित जी श्री सत्यनारायण भगवान की कथा कर रहे थे। सत्यनारायण भगवान की कथा के पश्चात आरती और गुरुदेव भगवान का पूजन किया गया।

इसके पश्चात सत्संग में श्री दादाजी महाराज की अमृतवाणी भक्तों को इस प्रकार प्राप्त हुई

कह हनवंत बिपति प्रभु सोई, जप तप सुमिरन भजन ना होई।

जप अलग हैं,तप अलग हैं,सुमिरन अलग हैं, भजन अलग हैं। ताली बजाकर गाना लोगों को रिझाना हैं यह भजन नहीं है, ईश्वर को रिझाने के लिए चिल्लाने की जरूरत नहीं हैं।

अजपा भजन होता हैं जिसमें ना तो जीभ हिलती हैं , ना होंठ हिलते हैं । अब बताओ ये भजन कैसे हैं? भजन किया नहीं जाता होने लगता हैं, वो ही भजन हैं। रामायण पढ़ रहे हैं मैं कब का बैठा हूं आ जाओ आ जाओ

जय श्री राम

घड़ी घड़ी सब घड़ी देखते, घड़ी ना जाने कोय।

उस घड़ी को देखिये, कौन घड़ी क्या होय।।

सियावर रामचंद्र की जय

सत्यनारायण भगवान की जय

आज के आनंद की जय

कुटुम्ब परिवार की जय

श्री दादाजी महाराज की जय(भक्तों ने बोली)

सत्यनारायण भगवान और गुरु महाराज के भोग के पश्चात सभी कुटुम्ब परिवार ने भंडारा किया। इस प्रकार श्री दादाजी महाराज का परम सानिध्य दास एवं परिवार को प्राप्त हुआ।

30 मई मंगलवार गंगा दशहरा को श्री दादाजी महाराज की अद्भुत लीला देखने को मिली। श्री रघुनाथ सिंह भाटी(पूर्व प्रदेश मंत्री भाजपा )श्री दादाजी महाराज के दर्शन के लिए आए । श्री दादाजी महाराज ने बुगले और हंस की कथा के माध्यम से संत और संसारी लोगों में अंतर को समझाया। श्री दादाजी महाराज ने आरती और पूजन के समय सद्गगुरू स्वरूप में दर्शन दिये । सवेरे 10:30 बजे श्री दादाजी महाराज ने सीगांव से प्रस्थान किया । श्री दादाजी महाराज के साथ श्री सुरेंद्र सिंह भाटी मालीबायां, कुलदीप भाटी सीगांव दूसरी गाड़ी में रघुनाथ सिंह भाटी, श्री अवध नारायण पटेल डोभा थे । नसरुल्लागंज में हमीर सिंह जी सोलंकी बिजला ने गुरुदेव भगवान के दर्शन प्राप्त किए, उसके बाद राला में सदगुरुदेव भगवान भारत सिंह भाटी के घर पहुंचे। राला से श्रीदादाजी महाराज रूद्र धाम रमगढा पहुंचे। रूद्र धाम में श्री दादाजी महाराज ने हनुमान जी को माला एवं नारियल चढवाया। आश्रम में फल प्रसाद ,माला और दक्षिणा दी। कृष्णा नामक ब्राह्मण बालक से गमछा बदला, दर्शनार्थियों को आम प्रसाद बांटा।11:24 बजे श्री चैतन्य हनुमान जी महाराज इटावा सरकार मंदिर पर पहुंचे, फल प्रसाद वितरित किया, गौ माता तथा मछलियों को खिचड़ी प्रसाद खिलाया । इटावा सरकार आश्रम के संत भगवान से वस्त्र लिए ,हमने हनुमान चालीसा का पाठ किया।

इसके पश्चात रेहटी में मुरारी भाईको दर्शन दिए ,फल लिये।12: 10 बजे श्री सुरेंद्र सिंह जी भाटी मालीबायां के घर श्री गुरुदेव भगवान पहुंचे। मालीबांया में गुरुदेव भगवान ने दादाजी धूनीवाले के रूप में दर्शन दिए। गायों और कुत्ते को खिचड़ी प्रसाद खिलाया। मालीबांया में भोजन प्रसादी के पश्चात विदाई लेकर श्री दादाजी महाराज सलकनपुर पहुंचे सलकनपुर में आयोजित होने वाले देवी लोक महोत्सव कार्यक्रम की तैयारी का निरीक्षण कर श्री दादाजी महाराज अन्नपूर्णा आश्रम नकटी तलाई पहुंचे। आश्रम में श्री दादाजी महाराज ने गौओं को खिचड़ी प्रसाद खिलाया , फल प्रसादी दी और भोजन प्रसादी साथ ली।बायां में श्री गुरुदेव भगवान के भक्त कृपाल भाई ने समोसा भेंट किये

नकटी तलाई से श्री दादाजी महाराज अमराझिरी आश्रम ऊंचाखेड़ा पहुंचे। अमराझिरी आश्रम में श्री दादाजी महाराज ने ब्रह्मलीन परम पूज्य परमहंस टाटाम्बरी गुरु महाराज के रूप में दर्शन दिए, गौओं को खिचड़ी प्रसाद खिलाया तथा उसी बाल्टी को धोकर उसमें पानी पिलाने का आदेश दिया। आश्रम में श्री दादाजी महाराज ने बेर प्रसाद दिया और कन्हैया राजा को अंगोछा दिया।

गुरु सदैव अमर होते हैं। परम पूज्य ब्रह्मलीन परमहंस श्री टाटम्बरी गुरु महाराज अमराझिरी द्वारा शरीर छोड़ने के पश्चात हम सभी भक्तों के जीवन में एक शून्य पैदा हो गया था। सत्य,प्रेम और करुणा की जीवंत मूर्ति दयानिधि गुरु महाराज के वात्सल्य की छाया में रहने के अभ्यस्त सभी भक्त उनकी समाधि के उपरांत व्याकुल हो उठे थे। श्री गुरुदेव भगवान कहा करते थे कि जो गुरु का लाल होता है उस पर सदैव गुरु की छाया रहती है। गुरुदेव की कृपा का अनुभव भक्त सदैव करते रहते हैं लेकिन उनकी दैहिक लीला सानिध्य से वंचित होने पर भक्तों को परमहंस सदगुरुदेव श्रीराम बाबाजी के रुप में भक्तों को पुन: सशरीर प्राप्त हो गये।

तारों में चंद्र समान हो तुम, गुरुदेव तुम्हारी जय होवें

अमराझिरी आश्रम से श्री दादाजी महाराज बुधनी नर्मदा जी के किनारे माधवदास जी महाराज के आश्रम पहुंचे। वहां पर गेंहू की बोरी दी, महात्माओं से कुशलक्षेम पूछी। इसके पश्चात बुधनी में मां नर्मदा जी के किनारे चल रही कथा और यज्ञ की पूर्णाहुति पर आरती के समय श्री दादाजी महाराज पहुंचे। भगवान शिव जी की आरती ओम जय शिव ओंकारा चल रही थी उसी समय श्री दादाजी महाराज त्रिशूल पर डमरु धारण कर शिव स्वरूप में स्थित हो गए। श्री दादाजी महाराज ने पुष्पमाला, आम,बेर, पेड़ा प्रसाद कथा संचालक पंडित जी को दिए। नर्मदाजी के किनारे नर्मदा जी के मंदिर के सामने हाथ में त्रिशूल डमरू धारण किए हुए, ललाट पर त्रिपुंड, गले में रुद्राक्ष की मालायें आनंदमयी मुद्रा में गुरुदेव भगवान नर्मदा जी की आरती के साथ यजमान श्री दादाजी महाराज की आरती कर रहे थे, भाव भक्ति से परिपूर्ण जनता जनार्दन मंत्रमुग्ध खड़े होकर श्री दादाजी महाराज के मुख चंद्र की ओर टकटकी लगाकर देख रही थी ,श्री दादाजी महाराज ने यजमान तथा कथा संचालक पंडित जी को आशीर्वाद स्वरुप पुष्प मालाएं पहनायी।

देवी सकल भुवन पर आप बिराजत निश दिन आनंदी नर्मदा जी की आरती की इस पंक्ति पर श्री दादाजी महाराज द्वारा हाथ उठाकर परमांनदी मुद्रा में प्रणाम करने पर कैसा लगा मानो समय ठहर गया हो तथा बुधनीवासियों को कथा का फल तत्काल ही प्राप्त हो गया।

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजेंद्रहारमं

सदावसंतमं ह्दयारविन्दे भवं भवानी सहीतं नमामि

आरती की पंक्ति के साथ श्री दादाजी महाराज ने गंगा दशहरा के उपलक्ष पर 10 कन्याओं को आम तथा मिठाई का भोग लगाया। कथा संचालक जी ने प्रसाद गाड़ी में रखवाया बुधनी कथा से विदाई लेकर श्री दादाजी महाराज होशंगाबाद की तरफ रवाना हुए । पुल पर श्री दादाजी महाराज ने पुष्प और नारियल मां नर्मदा को भेंट किया। बुधनी में शंकर स्वरूप दर्शन देने वाले श्री गुरुदेव भगवान श्री महात्यागी कोट आश्रम करुणानिधान मंदिर नर्मदा पुरम में श्री कन्हैया दास जी महाराज द्वारा चतुर्मास धूनी तापने की साधना पूर्ण होने पर भंडारा के शुभ अवसर पर हनुमंत स्वरूप में दर्शन दिये। आश्रम पर श्री दादाजी महाराज और हम सभी ने भंडारा पाया। श्री कन्हैया दास जी महाराज जी ने श्रीदादा जी महाराज का अभिनंदन किया। श्री दादाजी महाराज ने विदाई के समय बिगुल बजाया ऐसा लगा मानों श्रीकन्हैया दास जी महाराज को धूनी साधना पूर्ण होने पर उन्हें आशीर्वाद दे रहे हैं। नर्मदापुरम से बांद्राभान दक्षिण तट से उत्तर तट बांद्राभान पर शाम 5:15 बजे महाराज पहुंचे।बांद्राभान उत्तर तट पर गौ,कुत्ता तथा परिक्रमा वासियों को समोसा प्रसाद खिलाया।

बांद्राभान से शाम 5:51 पर श्री पंचमुखी हनुमान जी मंदिर गंगा घाट बनेटा श्री चैतन्य हनुमान जी महाराज ने गौ माताओं को समोसा प्रसाद खिलाया। शाम को 6:43 बजे हथनोरा आश्रम पर श्री दादाजी महाराज पहुंचे। भक्तों तथा गौ माताओं को समोसा प्रसाद दिया आश्रम से नीम और पीपल की जड़ को लिया। गांव में सदाव्रत चलाने वाले भक्तों को आम और पूड़ी प्रसाद दिया तथा गांव वालों को पूड़ी प्रसाद दिया।

जैत में नर्मदा जी के किनारे गौ माताओं को समोसा प्रसाद खिलाया। बकतरा होते हुए श्री चैतन्य हनुमान जी महाराज 7:54 बजे छिंद धाम मंगल मूर्ति मारुति नंदन हनुमान जी के मंदिर पहुंचे। गेट पर पंडित जी लेने आए, मंदिर पहुंचते ही माइक पर श्री दादाजी महाराज ने जय श्री राम का उद्घोष किया, मंदिर के पुजारी श्री दादाजी महाराज को देखकर आनंदित हो उठे।

श्री चैतन्य हनुमान जी महाराज को प्रणाम कर ब्राह्मणों ने छिंद धाम हनुमान जी महाराज की पुष्पमालाएं श्री दादाजी महाराज को पहना दी तथा मंदिर का घंटा भेंट किया। जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी। मंगलवार गंगा दशहरा को नर्मदा जी के किनारे विभिन्न घाटों , आश्रमों एवं मंदिरों में श्री चैतन्य हनुमान जी महाराज के विभिन्न स्वरूप और अद्भुत लीला के देव दुर्लभ दर्शन भक्तों ने श्री गुरुदेव भगवान की कृपा से प्राप्त किए। श्री दादाजी महाराज की दया सदैव ऐसी ही बनी रहे। छिंद धाम से से श्री दादाजी महाराज बटेरा मोहन सिंह जी रघुवंशी (शिक्षक) के घर पहुंचे । बटेरा में श्री दादाजी महाराज अमृतमयी वाणी गुंजायमान हुई कि गीता में भगवान कहते हैं कि जो मुझे जिस रूप में भजता है मैं उसे उस रूप में दर्शन देता हूं यह कह कर श्री दादाजी महाराज ने दिनभर अपने विभिन्न स्वरूपों का भक्तों को जो दर्शन कराया था उसकी पुष्टि की।

🙏श्री दादाजी महाराज की जय।🙏

हरि शरणं🚩

गुरू शरणं🚩

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